पंचांग

Delhi, India

रविवार, 26 जुलाई 2026 · रविवार

द्वादशी

शुक्ल पक्ष · तक 1:58 PM

✦ ज्येष्ठा चंद्र राशि: वृश्चिक आषाढ़ मास

बढ़ता उदय चंद्र

88.3% प्रकाशित

सूर्योदय

5:38 AM

सूर्यास्त

7:16 PM

चंद्रोदय

5:07 PM

चंद्रास्त

2:21 AM

सर्वोत्तम समय · अभिजित

12:00 PM से 12:54 PM

बचें · राहु काल

5:34 PM से 7:16 PM

पंचांग के पाँच अंग

तिथि

द्वादशी

शुक्ल पक्ष · तक 1:58 PM

नक्षत्र

ज्येष्ठा पद 4

तक 7:35 AM

योग

इंद्र

तक 10:05 PM

करण

बालव तक 1:58 PM

कौलव तक 3:08 AM, Jul 27

मुहूर्त समय

महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ समय चुनें और अशुभ समय से बचें।

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त
4:15 AM से 4:57 AM
प्रातः संध्या
4:36 AM से 5:38 AM
अभिजित मुहूर्त
12:00 PM से 12:54 PM
विजय मुहूर्त
2:43 PM से 3:38 PM
गोधूलि मुहूर्त
7:04 PM से 7:28 PM
सायाह्न संध्या
7:16 PM से 8:24 PM
अमृत काल
3:18 AM, Jul 27 से 5:06 AM, Jul 27
निशिता मुहूर्त
12:06 AM, Jul 27 से 12:48 AM, Jul 27

अशुभ समय

राहु काल
5:34 PM से 7:16 PM
यमगंड
3:51 PM से 5:34 PM
गुलिक काल
3:51 PM से 5:34 PM
दुर्मुहूर्त
5:27 PM से 6:21 PM
वर्ज्यम
4:32 PM से 6:20 PM
गंडमूल
5:38 AM से 7:35 AM
अन्य अशुभ समय
कुलिक 5:27 PM से 6:21 PM
कंटक / मृत्यु 10:11 AM से 11:05 AM
कालवेला / अर्धयाम 12:00 PM से 12:54 PM
यमघंटा 1:49 PM से 2:43 PM

सूर्य और चंद्रमा

मध्याह्न

12:27 PM

दिनमान

13 घंटे 37 मिनट

रात्रिमान

10 घंटे 22 मिनट

चंद्र आयु

11.5 दिन

चंद्र दूरी

405,529 किमी

सूर्य नक्षत्र

पुष्य · पद 2

हिन्दू पंचांग और संवत

विक्रम संवत 2083 सिद्धार्थी
शक संवत 1948 पराभव
गुजराती संवत 2082 पिंगल
कलि संवत 5127
माह (अमांत) आषाढ़
माह (पूर्णिमांत) आषाढ़
प्रविष्टे / गते 11
Paksha शुक्ल पक्ष
वार रविवार (रविवार)
द्रिक ऋतु वर्षा
वैदिक ऋतु ग्रीष्म
द्रिक अयन दक्षिणायन
वैदिक अयन दक्षिणायन

राशि और नक्षत्र

चंद्र राशि

वृश्चिक

तक 7:35 AM, फिर धनु

सूर्य राशि

कर्क

नक्षत्र पद

ज्येष्ठा-4

सूर्य नक्षत्र

पुष्य पद 2

दिशा शूल

पश्चिम

इस दिशा में यात्रा से बचें

आनंदादि योग

काण

तमिल योग

मरण

चंद्रबल और ताराबल

चंद्रमा के आधार पर आज के अनुकूल राशियाँ और नक्षत्र।

शुभ चंद्रबल (राशियाँ)

वृषभ मिथुन कन्या वृश्चिक मकर कुंभ

शुभ ताराबल (नक्षत्र)

अश्विनी भरणी रोहिणी आर्द्रा पुष्य आश्लेषा मघा पूर्वा फाल्गुनी हस्त स्वाति अनुराधा ज्येष्ठा मूल पूर्वाषाढ़ा श्रवण शतभिषा उत्तराभाद्रपद रेवती

ग्रह स्थिति

सूर्योदय पर सायन (लाहिड़ी) स्थितियाँ।

ग्रह राशि देशांतर नक्षत्र गति
सूर्य कर्क Cancer 08-49-49 पुष्य-2 सीधी चाल
चंद्र वृश्चिक Scorpio 29-02-31 ज्येष्ठा-4 सीधी चाल
मंगल वृषभ Taurus 24-45-59 मृगशिरा-1 सीधी चाल
बुध मिथुन Gemini 22-17-17 पुनर्वसु-1 सीधी चाल
बृहस्पति कर्क Cancer 11-24-13 पुष्य-3 सीधी चाल
शुक्र सिंह Leo 23-31-44 पूर्वा फाल्गुनी-4 सीधी चाल
शनि मीन Pisces 20-31-07 रेवती-2 सीधी चाल
राहु कुंभ Aquarius 07-01-56 शतभिषा-1 वक्री
केतु सिंह Leo 07-01-56 मघा-3 वक्री
यूरेनस वृषभ Taurus 10-34-18 रोहिणी-1 सीधी चाल
नेप्च्यून मीन Pisces 10-05-44 उत्तराभाद्रपद-3 वक्री
प्लूटो मकर Capricorn 10-05-05 श्रवण-1 वक्री
उदय लग्न (लग्न समय) प्रत्येक राशि पूर्वी क्षितिज पर कब उदय होती है

मिथुन

4:38 AM – 5:02 AM

कर्क

5:02 AM – 7:22 AM

सिंह

7:22 AM – 9:39 AM

कन्या

9:39 AM – 11:56 AM

तुला

11:56 AM – 2:15 PM

वृश्चिक

2:15 PM – 4:34 PM

धनु

4:34 PM – 6:37 PM

मकर

6:37 PM – 8:20 PM

कुंभ

8:20 PM – 9:48 PM

मीन

9:48 PM – 11:12 PM

मेष

11:12 PM – 12:48 AM, Jul 27

वृषभ

12:48 AM, Jul 27 – 2:43 AM, Jul 27

मिथुन

2:43 AM, Jul 27 – 4:58 AM, Jul 27

कर्क

4:58 AM, Jul 27 – 5:38 AM, Jul 27

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पंचांग क्या है?

पंचांग (संस्कृत: पञ्चाङ्ग) हिन्दू पंचिका है जो पारंपरिक हिन्दू कालगणना के आधार पर दैनिक ज्योतिषीय विवरण देती है। इस शब्द का अर्थ है "पाँच अंग" - वे पाँच तत्व जो किसी दिन की प्रकृति और समय की गुणवत्ता का वर्णन करते हैं। भारत भर में पुरोहित, ज्योतिषी और परिवार विवाह, व्यवसाय प्रारंभ, गृह प्रवेश और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों से पहले पंचांग देखते हैं।

पंचांग के पाँच तत्व

तत्व यह क्या दर्शाता है
तिथिचंद्र दिवस - सूर्य और चंद्रमा के बीच के कोणीय अंतर को 12° खंडों में मापा जाता है, जो शुक्ल और कृष्ण पक्ष में 1-30 तक चलता है
नक्षत्रचंद्र नक्षत्र - उन 27 विभाजनों में से एक जिनसे चंद्रमा गुजरता है; प्रत्येक के अपने गुण और अधिष्ठाता देवता होते हैं
योगदैनिक योग - सूर्य और चंद्रमा की दीर्घांशों के योग को 27 भागों में बाँटकर निकाला जाता है; परंपरा में कुछ योग अन्य की तुलना में अधिक शुभ माने जाते हैं
करणतिथि का आधा भाग - महीने भर में 11 करण क्रमशः चलते हैं; बव, बालव और कौलव जैसे कुछ करण परंपरागत रूप से शुभ माने जाते हैं
वारसप्ताह का दिन (वार) - परंपरागत रूप से प्रत्येक दिन एक ग्रह से जुड़ा माना जाता है: रविवार (सूर्य), सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि)

पंचांग स्थान के अनुसार क्यों बदलता है?

पंचांग का समय स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित होता है। चूँकि सूर्य हर शहर में अलग-अलग समय पर उदय होता है, इसलिए राहु काल, अभिजित मुहूर्त और तिथि-नक्षत्र के समाप्ति समय जैसी अवधियाँ एक स्थान से दूसरे स्थान में बदल जाती हैं। कोई भी मुहूर्त तय करने से पहले हमेशा अपने शहर के लिए गणना किया गया पंचांग देखें।

राहु काल क्या है?

राहु काल (राहु कालम) लगभग 90 मिनट का पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाने वाला समय है, जो प्रतिदिन सूर्यোদय और सूर्यास्त के बीच एक बार आता है। वैदिक ज्योतिष में इसे राहु, छाया ग्रह, से जोड़ा जाता है। पारंपरिक रूप से राहु काल में किसी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से बचा जाता है। यह समय सप्ताह के प्रत्येक दिन बदलता है और स्थानीय सूर्योदय तथा सूर्यास्त के आधार पर निकाला जाता है।

शुभ समय (शुभ मुहूर्त)

मुहूर्त वह पारंपरिक शुभ समय है जिसे अनुकूल तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार को मिलाकर चुना जाता है। पंचांग में बताए जाने वाले प्रमुख समयों में ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग 96 मिनट पहले, जिसे ध्यान और अध्ययन के लिए अनुकूल माना जाता है), अभिजीत मुहूर्त (मध्याह्न का एक समय जिसे व्यापक रूप से शुभ माना जाता है), और चंद्रबल (वे समय जब चंद्रमा आपकी जन्म राशि के लिए अनुकूल माना जाता है) शामिल हैं। बहुत से लोग महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से पहले राहु काल, यमगंड और गुलिक काल से भी बचते हैं।