पंचांग

Bilimora, India

शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 · शुक्रवार

पूर्णिमा/अमावस्या

शुक्ल पक्ष · तक 9:48 AM

✦ शतभिषा चंद्र राशि: कुंभ श्रवण मास

पूर्णिमा

100% प्रकाशित

सूर्योदय

6:20 AM

सूर्यास्त

6:57 PM

चंद्रोदय

7:06 PM

चंद्रास्त

6:16 AM

सर्वोत्तम समय · अभिजित

12:14 PM से 1:04 PM

बचें · राहु काल

11:04 AM से 12:39 PM

पंचांग के पाँच अंग

तिथि

पूर्णिमा/अमावस्या

शुक्ल पक्ष · तक 9:48 AM

नक्षत्र

शतभिषा पद 1

तक 3:13 AM, Aug 29

योग

अतिगंड

तक 7:27 AM

करण

बव तक 9:48 AM

बालव तक 9:56 PM

मुहूर्त समय

महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ समय चुनें और अशुभ समय से बचें।

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त
4:49 AM से 5:35 AM
प्रातः संध्या
5:12 AM से 6:20 AM
अभिजित मुहूर्त
12:14 PM से 1:04 PM
विजय मुहूर्त
2:45 PM से 3:35 PM
गोधूलि मुहूर्त
6:45 PM से 7:09 PM
सायाह्न संध्या
6:57 PM से 8:05 PM
अमृत काल
7:44 PM से 9:24 PM
निशिता मुहूर्त
12:16 AM, Aug 29 से 1:02 AM, Aug 29

अशुभ समय

राहु काल
11:04 AM से 12:39 PM
यमगंड
2:13 PM से 3:48 PM
गुलिक काल
7:55 AM से 9:30 AM
दुर्मुहूर्त
8:52 AM से 9:42 AM
1:04 PM से 1:55 PM
वर्ज्यम
9:45 AM से 11:24 AM
आडल योग
6:20 AM से 3:13 AM, Aug 29
विडाल योग
3:13 AM, Aug 29 से 6:21 AM, Aug 29
पंचक
अग्नि पंचक
अन्य अशुभ समय
कुलिक 8:52 AM से 9:42 AM
कंटक / मृत्यु 1:55 PM से 2:45 PM
कालवेला / अर्धयाम 3:35 PM से 4:26 PM
यमघंटा 5:16 PM से 6:07 PM

सूर्य और चंद्रमा

मध्याह्न

12:39 PM

दिनमान

12 घंटे 37 मिनट

रात्रिमान

11 घंटे 22 मिनट

चंद्र आयु

14.6 दिन

चंद्र दूरी

390,924 किमी

सूर्य नक्षत्र

मघा · पद 4

हिन्दू पंचांग और संवत

विक्रम संवत 2083 सिद्धार्थी
शक संवत 1948 पराभव
गुजराती संवत 2082 पिंगल
कलि संवत 5127
माह (अमांत) श्रवण
माह (पूर्णिमांत) श्रवण
प्रविष्टे / गते 12
Paksha शुक्ल पक्ष
वार शुक्रवार (शुक्रवार)
द्रिक ऋतु शरद
वैदिक ऋतु वर्षा
द्रिक अयन दक्षिणायन
वैदिक अयन दक्षिणायन

राशि और नक्षत्र

चंद्र राशि

कुंभ

तक 9:37 PM, Aug 29, फिर मीन

सूर्य राशि

सिंह

नक्षत्र पद

शतभिषा-1

सूर्य नक्षत्र

मघा पद 4

दिशा शूल

पश्चिम

इस दिशा में यात्रा से बचें

आनंदादि योग

सौम्य

तमिल योग

मरण

चंद्रबल और ताराबल

चंद्रमा के आधार पर आज के अनुकूल राशियाँ और नक्षत्र।

शुभ चंद्रबल (राशियाँ)

मेष वृषभ सिंह कन्या धनु कुंभ

शुभ ताराबल (नक्षत्र)

अश्विनी कृत्तिका मृगशिरा आर्द्रा पुनर्वसु पुष्य मघा उत्तरा फाल्गुनी चित्रा स्वाति विशाखा अनुराधा मूल उत्तराषाढ़ा धनिष्ठा शतभिषा पूर्वाभाद्रपद उत्तराभाद्रपद

ग्रह स्थिति

सूर्योदय पर सायन (लाहिड़ी) स्थितियाँ।

ग्रह राशि देशांतर नक्षत्र गति
सूर्य सिंह Leo 10-31-50 मघा-4 सीधी चाल
चंद्र कुंभ Aquarius 08-49-47 शतभिषा-1 सीधी चाल
मंगल मिथुन Gemini 16-38-08 आर्द्रा-3 सीधी चाल
बुध सिंह Leo 10-51-10 मघा-4 सीधी चाल
बृहस्पति कर्क Cancer 18-37-47 आश्लेषा-1 सीधी चाल
शुक्र कन्या Virgo 25-40-49 चित्रा-1 सीधी चाल
शनि मीन Pisces 19-39-42 रेवती-1 वक्री
राहु कुंभ Aquarius 05-16-55 धनिष्ठा-4 वक्री
केतु सिंह Leo 05-16-55 मघा-2 वक्री
यूरेनस वृषभ Taurus 11-23-03 रोहिणी-1 सीधी चाल
नेप्च्यून मीन Pisces 09-31-43 उत्तराभाद्रपद-2 वक्री
प्लूटो मकर Capricorn 09-21-14 उत्तराषाढ़ा-4 वक्री
उदय लग्न (लग्न समय) प्रत्येक राशि पूर्वी क्षितिज पर कब उदय होती है

कर्क

5:20 AM – 5:38 AM

सिंह

5:38 AM – 7:48 AM

कन्या

7:48 AM – 9:57 AM

तुला

9:57 AM – 12:09 PM

वृश्चिक

12:09 PM – 2:24 PM

धनु

2:24 PM – 4:30 PM

मकर

4:30 PM – 6:18 PM

कुंभ

6:18 PM – 7:53 PM

मीन

7:53 PM – 9:26 PM

मेष

9:26 PM – 11:08 PM

वृषभ

11:08 PM – 1:07 AM, Aug 29

मिथुन

1:07 AM, Aug 29 – 3:20 AM, Aug 29

कर्क

3:20 AM, Aug 29 – 5:34 AM, Aug 29

सिंह

5:34 AM, Aug 29 – 6:20 AM, Aug 29

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पंचांग क्या है?

पंचांग (संस्कृत: पञ्चाङ्ग) हिन्दू पंचिका है जो पारंपरिक हिन्दू कालगणना के आधार पर दैनिक ज्योतिषीय विवरण देती है। इस शब्द का अर्थ है "पाँच अंग" - वे पाँच तत्व जो किसी दिन की प्रकृति और समय की गुणवत्ता का वर्णन करते हैं। भारत भर में पुरोहित, ज्योतिषी और परिवार विवाह, व्यवसाय प्रारंभ, गृह प्रवेश और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों से पहले पंचांग देखते हैं।

पंचांग के पाँच तत्व

तत्व यह क्या दर्शाता है
तिथिचंद्र दिवस - सूर्य और चंद्रमा के बीच के कोणीय अंतर को 12° खंडों में मापा जाता है, जो शुक्ल और कृष्ण पक्ष में 1-30 तक चलता है
नक्षत्रचंद्र नक्षत्र - उन 27 विभाजनों में से एक जिनसे चंद्रमा गुजरता है; प्रत्येक के अपने गुण और अधिष्ठाता देवता होते हैं
योगदैनिक योग - सूर्य और चंद्रमा की दीर्घांशों के योग को 27 भागों में बाँटकर निकाला जाता है; परंपरा में कुछ योग अन्य की तुलना में अधिक शुभ माने जाते हैं
करणतिथि का आधा भाग - महीने भर में 11 करण क्रमशः चलते हैं; बव, बालव और कौलव जैसे कुछ करण परंपरागत रूप से शुभ माने जाते हैं
वारसप्ताह का दिन (वार) - परंपरागत रूप से प्रत्येक दिन एक ग्रह से जुड़ा माना जाता है: रविवार (सूर्य), सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि)

पंचांग स्थान के अनुसार क्यों बदलता है?

पंचांग का समय स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित होता है। चूँकि सूर्य हर शहर में अलग-अलग समय पर उदय होता है, इसलिए राहु काल, अभिजित मुहूर्त और तिथि-नक्षत्र के समाप्ति समय जैसी अवधियाँ एक स्थान से दूसरे स्थान में बदल जाती हैं। कोई भी मुहूर्त तय करने से पहले हमेशा अपने शहर के लिए गणना किया गया पंचांग देखें।

राहु काल क्या है?

राहु काल (राहु कालम) लगभग 90 मिनट का पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाने वाला समय है, जो प्रतिदिन सूर्यোদय और सूर्यास्त के बीच एक बार आता है। वैदिक ज्योतिष में इसे राहु, छाया ग्रह, से जोड़ा जाता है। पारंपरिक रूप से राहु काल में किसी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से बचा जाता है। यह समय सप्ताह के प्रत्येक दिन बदलता है और स्थानीय सूर्योदय तथा सूर्यास्त के आधार पर निकाला जाता है।

शुभ समय (शुभ मुहूर्त)

मुहूर्त वह पारंपरिक शुभ समय है जिसे अनुकूल तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार को मिलाकर चुना जाता है। पंचांग में बताए जाने वाले प्रमुख समयों में ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग 96 मिनट पहले, जिसे ध्यान और अध्ययन के लिए अनुकूल माना जाता है), अभिजीत मुहूर्त (मध्याह्न का एक समय जिसे व्यापक रूप से शुभ माना जाता है), और चंद्रबल (वे समय जब चंद्रमा आपकी जन्म राशि के लिए अनुकूल माना जाता है) शामिल हैं। बहुत से लोग महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से पहले राहु काल, यमगंड और गुलिक काल से भी बचते हैं।