पंचांग

Agartala, India

शुक्रवार, 26 जून 2026 · शुक्रवार

द्वादशी

शुक्ल पक्ष · तक 10:22 PM

✦ विशाखा चंद्र राशि: तुला ज्येष्ठा मास

बढ़ता उदय चंद्र

85.8% प्रकाशित

सूर्योदय

4:39 AM

सूर्यास्त

6:15 PM

चंद्रोदय

3:20 PM

चंद्रास्त

1:26 AM

सर्वोत्तम समय · अभिजित

11:00 AM से 11:54 AM

बचें · राहु काल

9:45 AM से 11:27 AM

पंचांग के पाँच अंग

तिथि

द्वादशी

शुक्ल पक्ष · तक 10:22 PM

नक्षत्र

विशाखा पद 2

तक 7:16 PM

योग

सिद्ध

तक 11:38 AM

करण

बव तक 9:14 AM

बालव तक 10:22 PM

मुहूर्त समय

महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ समय चुनें और अशुभ समय से बचें।

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त
3:16 AM से 3:57 AM
प्रातः संध्या
3:37 AM से 4:39 AM
अभिजित मुहूर्त
11:00 AM से 11:54 AM
विजय मुहूर्त
1:43 PM से 2:38 PM
गोधूलि मुहूर्त
6:03 PM से 6:27 PM
सायाह्न संध्या
6:15 PM से 7:23 PM
अमृत काल
9:27 AM से 11:14 AM
निशिता मुहूर्त
11:07 PM से 11:48 PM

अशुभ समय

राहु काल
9:45 AM से 11:27 AM
यमगंड
1:09 PM से 2:51 PM
गुलिक काल
6:21 AM से 8:03 AM
दुर्मुहूर्त
7:22 AM से 8:17 AM
11:54 AM से 12:49 PM
वर्ज्यम
11:45 PM से 1:32 AM, Jun 27
अन्य अशुभ समय
कुलिक 7:22 AM से 8:17 AM
कंटक / मृत्यु 12:49 PM से 1:43 PM
कालवेला / अर्धयाम 2:38 PM से 3:32 PM
यमघंटा 4:27 PM से 5:21 PM

सूर्य और चंद्रमा

मध्याह्न

11:27 AM

दिनमान

13 घंटे 36 मिनट

रात्रिमान

10 घंटे 23 मिनट

चंद्र आयु

11.1 दिन

चंद्र दूरी

404,089 किमी

सूर्य नक्षत्र

आर्द्रा · पद 2

हिन्दू पंचांग और संवत

विक्रम संवत 2083 सिद्धार्थी
शक संवत 1948 पराभव
गुजराती संवत 2082 पिंगल
कलि संवत 5127
माह (अमांत) ज्येष्ठा
माह (पूर्णिमांत) ज्येष्ठा
प्रविष्टे / गते 12
Paksha शुक्ल पक्ष
वार शुक्रवार (शुक्रवार)
द्रिक ऋतु वर्षा
वैदिक ऋतु ग्रीष्म
द्रिक अयन दक्षिणायन
वैदिक अयन उत्तरायण

राशि और नक्षत्र

चंद्र राशि

तुला

तक 12:33 PM, फिर वृश्चिक

सूर्य राशि

मिथुन

नक्षत्र पद

विशाखा-2

सूर्य नक्षत्र

आर्द्रा पद 2

दिशा शूल

पश्चिम

इस दिशा में यात्रा से बचें

आनंदादि योग

मातंग

तमिल योग

अमृत

चंद्रबल और ताराबल

चंद्रमा के आधार पर आज के अनुकूल राशियाँ और नक्षत्र।

शुभ चंद्रबल (राशियाँ)

मेष वृषभ सिंह तुला धनु मकर

शुभ ताराबल (नक्षत्र)

भरणी रोहिणी आर्द्रा पुनर्वसु पुष्य आश्लेषा पूर्वा फाल्गुनी हस्त स्वाति विशाखा अनुराधा ज्येष्ठा पूर्वाषाढ़ा श्रवण शतभिषा पूर्वाभाद्रपद उत्तराभाद्रपद रेवती

ग्रह स्थिति

सूर्योदय पर सायन (लाहिड़ी) स्थितियाँ।

ग्रह राशि देशांतर नक्षत्र गति
सूर्य मिथुन Gemini 10-10-23 आर्द्रा-2 सीधी चाल
चंद्र तुला Libra 26-04-14 विशाखा-2 सीधी चाल
मंगल वृषभ Taurus 03-44-07 कृत्तिका-3 सीधी चाल
बुध कर्क Cancer 01-28-58 पुनर्वसु-4 सीधी चाल
बृहस्पति कर्क Cancer 04-51-40 पुष्य-1 सीधी चाल
शुक्र कर्क Cancer 20-13-42 आश्लेषा-2 सीधी चाल
शनि मीन Pisces 19-43-17 रेवती-1 सीधी चाल
राहु कुंभ Aquarius 08-37-27 शतभिषा-1 वक्री
केतु सिंह Leo 08-37-27 मघा-3 वक्री
यूरेनस वृषभ Taurus 09-13-17 कृत्तिका-4 सीधी चाल
नेप्च्यून मीन Pisces 10-09-09 उत्तराभाद्रपद-3 सीधी चाल
प्लूटो मकर Capricorn 10-44-49 श्रवण-1 वक्री
उदय लग्न (लग्न समय) प्रत्येक राशि पूर्वी क्षितिज पर कब उदय होती है

वृषभ

3:39 AM – 4:00 AM

मिथुन

4:00 AM – 6:13 AM

कर्क

6:13 AM – 8:30 AM

सिंह

8:30 AM – 10:43 AM

कन्या

10:43 AM – 12:54 PM

तुला

12:54 PM – 3:09 PM

वृश्चिक

3:09 PM – 5:25 PM

धनु

5:25 PM – 7:30 PM

मकर

7:30 PM – 9:16 PM

कुंभ

9:16 PM – 10:48 PM

मीन

10:48 PM – 12:18 AM, Jun 27

मेष

12:18 AM, Jun 27 – 1:58 AM, Jun 27

वृषभ

1:58 AM, Jun 27 – 3:56 AM, Jun 27

मिथुन

3:56 AM, Jun 27 – 4:39 AM, Jun 27

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पंचांग क्या है?

पंचांग (संस्कृत: पञ्चाङ्ग) हिन्दू पंचिका है जो पारंपरिक हिन्दू कालगणना के आधार पर दैनिक ज्योतिषीय विवरण देती है। इस शब्द का अर्थ है "पाँच अंग" - वे पाँच तत्व जो किसी दिन की प्रकृति और समय की गुणवत्ता का वर्णन करते हैं। भारत भर में पुरोहित, ज्योतिषी और परिवार विवाह, व्यवसाय प्रारंभ, गृह प्रवेश और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों से पहले पंचांग देखते हैं।

पंचांग के पाँच तत्व

तत्व यह क्या दर्शाता है
तिथिचंद्र दिवस - सूर्य और चंद्रमा के बीच के कोणीय अंतर को 12° खंडों में मापा जाता है, जो शुक्ल और कृष्ण पक्ष में 1-30 तक चलता है
नक्षत्रचंद्र नक्षत्र - उन 27 विभाजनों में से एक जिनसे चंद्रमा गुजरता है; प्रत्येक के अपने गुण और अधिष्ठाता देवता होते हैं
योगदैनिक योग - सूर्य और चंद्रमा की दीर्घांशों के योग को 27 भागों में बाँटकर निकाला जाता है; परंपरा में कुछ योग अन्य की तुलना में अधिक शुभ माने जाते हैं
करणतिथि का आधा भाग - महीने भर में 11 करण क्रमशः चलते हैं; बव, बालव और कौलव जैसे कुछ करण परंपरागत रूप से शुभ माने जाते हैं
वारसप्ताह का दिन (वार) - परंपरागत रूप से प्रत्येक दिन एक ग्रह से जुड़ा माना जाता है: रविवार (सूर्य), सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि)

पंचांग स्थान के अनुसार क्यों बदलता है?

पंचांग का समय स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित होता है। चूँकि सूर्य हर शहर में अलग-अलग समय पर उदय होता है, इसलिए राहु काल, अभिजित मुहूर्त और तिथि-नक्षत्र के समाप्ति समय जैसी अवधियाँ एक स्थान से दूसरे स्थान में बदल जाती हैं। कोई भी मुहूर्त तय करने से पहले हमेशा अपने शहर के लिए गणना किया गया पंचांग देखें।

राहु काल क्या है?

राहु काल (राहु कालम) लगभग 90 मिनट का पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाने वाला समय है, जो प्रतिदिन सूर्यোদय और सूर्यास्त के बीच एक बार आता है। वैदिक ज्योतिष में इसे राहु, छाया ग्रह, से जोड़ा जाता है। पारंपरिक रूप से राहु काल में किसी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से बचा जाता है। यह समय सप्ताह के प्रत्येक दिन बदलता है और स्थानीय सूर्योदय तथा सूर्यास्त के आधार पर निकाला जाता है।

शुभ समय (शुभ मुहूर्त)

मुहूर्त वह पारंपरिक शुभ समय है जिसे अनुकूल तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार को मिलाकर चुना जाता है। पंचांग में बताए जाने वाले प्रमुख समयों में ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग 96 मिनट पहले, जिसे ध्यान और अध्ययन के लिए अनुकूल माना जाता है), अभिजीत मुहूर्त (मध्याह्न का एक समय जिसे व्यापक रूप से शुभ माना जाता है), और चंद्रबल (वे समय जब चंद्रमा आपकी जन्म राशि के लिए अनुकूल माना जाता है) शामिल हैं। बहुत से लोग महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से पहले राहु काल, यमगंड और गुलिक काल से भी बचते हैं।